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<p style="text-align: justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> एससी/एसटी एक्ट पर फैसला देने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एके गोयल को नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) का अध्यक्ष बनाए जाने पर दलित नेताओं ने सवाल उठाये हैं. एनडीए में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उन्हें पद से बर्खास्त करने की मांग की है. साथ ही पार्टी ने कहा कि वह एससी/एक्ट पर अध्यादेश लाए.</p> <p style="text-align: justify;">केंद्रीय मंत्री और एलजेपी अध्यक्ष रामविलास पासवान के सांसद बेटे चिराग पासवान ने पीएम को पत्र लिखकर कहा, ''सरकार द्वारा अतिशीघ्र जस्टिस (रिटायर्ड) एके गोयल को एनजीटी चेयरमैन पद से बर्खास्त किया जाए.''</p> <p style="text-align: justify;">चिराग ने पत्र में कहा, ''संसद के चालू सत्र में विधेयक लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रभाव से अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के कानूनी सुरक्षा की व्यवस्था को बहाल किया जाए. अगर इसमें कोई अड़चन है तो संसद के चालू सत्र को दो दिन पहले खत्म कर अध्यादेश लाया जाए.'' उन्होंने कहा कि सरकार के इन कदमों से एससी/एसटी के बीच विश्वास का माहौल पैदा होगा.</p> <p style="text-align: justify;"><a href="https://static.abplive.in/wp-content/uploads/sites/2/2018/07/26041056/Chirag-Paswan-n.jpg"><img class="aligncenter wp-image-922991 size-full" src="https://ift.tt/2JVHZxK" alt="" width="468" height="589" /></a></p> <p style="text-align: justify;">आपको बता दें कि 23 जुलाई को मोदी सरकार में मंत्री <a href="https://abpnews.abplive.in/india-news/modi-dalit-minister-ram-vilas-paswan-on-ngt-judge-ak-goel-and-sc-st-act-921329"><strong>रामविलास पासवान के घर पर एनडीए के दलित सांसदों</strong> </a>की बैठक हुई जिसमें एससी/एसटी अत्याचार निरोधक कानून और सरकारी नौकरियों में प्रोमोशन में आरक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी. इसी बैठक में जस्टिस गोयल को हटाने के लिए दलित सांसदों ने सहमति दी थी.</p> <p style="text-align: justify;">जस्टिस गोयल छह जुलाई को सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए थे और उसके बाद सरकार ने उन्हें एनजीटी अध्यक्ष नियुक्त किया था. एनडीए के सांसदों का कहना है कि जस्टिस गोयल की नियुक्ति से दलितों के बीच अच्छा संदेश नहीं गया. इससे चुनावों में नुकसान हो सकता है.</p> <p style="text-align: justify;">इसी साल 20 मार्च को जस्टिस गोयल और जस्टिस उदय उमेश ललित की पीठ ने एससी/एसटी एक्ट में बड़ा बदलाव करते हुए आदेश दिया था कि किसी आरोपी को दलितों पर अत्याचार के मामले में प्रारंभिक जांच के बिना गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है. पहले केस दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी का प्रावधान था. आदेश के मुताबिक, अगर किसी के खिलाफ एससी/एसटी उत्पीड़न का मामला दर्ज होता है, तो वो अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकेगा.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a href="https://abpnews.abplive.in/uttar-pradesh/meerut-dalit-student-beaten-viral-video-921408">मारपीट कर दलित युवक से दिलाई गईं 'दलित और अंबेडकर' को गालियां</a></strong></p> <p style="text-align: justify;">विपक्षी दलों और दलित चिंतकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने मजबूती से पक्ष नहीं रखा. जिसकी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला दिया और कानून कमजोर हुआ. विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार धीरे-धीरे आरक्षण खत्म करना चाहती है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलितों ने सड़कों पर आंदोलन किया था. जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी.</p> <p style="text-align: justify;"><strong><a href="https://abpnews.abplive.in/india-news/three-minor-starvation-deaths-in-delhi-bjp-congress-attack-kejriwal-government-aap-tweets-922938">दिल्ली में 'भूख' से मौत पर सियासत: BJP बोली- शर्म करो केजरीवाल, AAP ने कहा- LG ने रोका राशन</a></strong></p>

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