<p style="text-align: justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए होने वाले चुनाव से ठीक पहले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) को एक झटका लगा है. संसद की सबसे अहम लोक लेखा समिति के राज्यसभा कोटे से सदस्य बनने के लिए कल हुए चुनाव में एनडीए के उपसभापति पद के उम्मीदवार हरिवंश को केवल 26 वोट मिले.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>विपक्ष की सांकेतिक जीत, टीडीपी को मिले सबसे ज़्यादा वोट</strong> लोक लेखा समिति यानि पीएसी सदस्य की दो सीटों के लिए ये चुनाव हुआ था. चुनाव में राज्यसभा के कुल 245 सदस्यों में से 205 सदस्यों ने मतदान किया. मतदान में सबसे ज़्यादा 110 वोट टीडीपी के सी एम रमेश को मिले. दूसरे नंबर पर बीजेपी के भूपेंद्र यादव रहे जिनको 69 वोट मिले जबकि हरिवंश को मात्र 26 वोटों से ही संतोष करना पड़ा. वैसे एनडीए के लिए राहत की बात ये कही जा सकती है कि उसके कई सदस्यों ने वोट नहीं किया. अगर भूपेंद्र यादव और हरिवंश को मिले मतों को जोड़ दिया जाए तो कुल 95 मत पड़े.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>क्यों पड़ी चुनाव की ज़रूरत?</strong> लोक लेखा समिति के राज्यसभा कोटे से खाली पड़े दो सदस्यों की जगह के लिए सोमवार को चुनाव करवाना पड़ा क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाई और दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार खड़े हो गए. आमतौर पर समिति के सदस्यों का चयन आम सहमति से हो जाया करता है लेकिन आखिरी दो सदस्यों के लिए नामों पर सहमति नहीं बन पाई और तीन लोगों ने दावा ठोंक दिया. विपक्ष के सूत्रों ने दावा किया कि उनकी तरफ़ से बीजेपी को ये प्रस्ताव दिया गया था कि एक सीट सत्तापक्ष और एक सीट विपक्ष को दे दिया जाए. लेकिन बात नहीं बन पाई. चुनाव के बाद सीएम रमेश और भूपेंद्र यादव लोक लेखा समिति के सदस्य चुन लिए गए.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>उपसभापति चुनाव से पहले ख़तरे की घन्टी?</strong> राज्यसभा के उपसभापति पद के चुनाव के ऐन पहले आए इस नतीजे ने सरकार की चिंताएं ज़रूर बढ़ा दी होंगी. सरकार के प्रबंधक तर्क़ तो दे रहे हैं कि चुनाव में केवल 205 वोट पड़े और उनके कई सदस्यों ने वोट नहीं किया. लेकिन टीडीपी उम्मीदवार को मिले 110 वोट एनडीए के मैनेजरों के लिए ख़तरे की घन्टी बज गई होगी. राज्यसभा के संख्याबल से साफ़ है कि उपसभापति पद के चुनाव में कांटे की टक्कर होगी और हर एक वोट क़ीमती होने वाला है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>अकाली दल वोटिंग में नहीं होगा शामिल?</strong> लोक लेखा समिति का चौंकाने वाला परिणाम तब आया है जब एनडीए के सबसे पुराने घटक दलों में शामिल अकाली दल की नाराजगी की खबरें आ रही हैं . उपसभापति पद के लिए जेडीयू के सांसद को उम्मीदवार बनाए जाने से अकाली दल खुश नहीं है क्योंकि इस पद पर पहले से पार्टी सांसद नरेश गुजराल का नाम चल रहा था. ऐसी भी संभावना है कि अगर नाराजगी बरक़रार रहती है तो पार्टी उपसभापति के चुनाव पर मतदान में शामिल नहीं होगी. वहीं शिवसेना को लेकर भी कुछ नहीं कहा जा सकता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>संसद की सबसे शक्तिशाली समिति: लोक लेखा समिति</strong> लोक लेखा समिति में 22 सदस्य होते हैं जिनमें 15 लोकसभा के और 7 राज्यसभा के सदस्य होते हैं. संसदीय समितियों में इसे सबसे अहम और शक्तिशाली माना जाता है. समिति का मुख्य काम सीएजी द्वारा दी गई रिपोर्टों की समीक्षा करना होता है. इसके अलावा समिति स्वतः भी सरकारी खर्चे और आमदनी से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करती है. समिति के अध्यक्ष परम्परागत तौर पर लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी का कोई सदस्य होता है और सदस्यों का चयन आमतौर पर आमसहमति से ही होता है. कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे फिलहाल इस समिति के अध्यक्ष हैं. समिति का गठन एक साल के लिए होता है और हर साल इसका पुनर्गठन होता है.</p> <p style="text-align: justify;">देखें, टॉप 10 न्यूज़ बुलेटिन का <strong>वीडियो</strong></p> <code><iframe class="vidfyVideo" style="border: 0px;" src="https://ift.tt/2Mrvn3I" width="631" height="381" scrolling="no"></iframe></code>


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